वादे का धागा
रक्षाबंधन की सुबह घर में घी और गेंदे के फूलों की खुशबू घुली थी, और खुशी से एक पल भी बैठा नहीं जा रहा था। उसने अनीश की राखी तीन दिन पहले चुनी थी — छोटी-सी, लाल और सुनहरी, बीच में एक काँच का मोती जो रोशनी में चमकता था। अब उसने भाई की कलाई…
